एक देहाती वैलेंटाइन .. A perfect tale ( by : Mithilesh Gupta)


एक देहाती वैलेंटाइन .. A perfect tale
कहानी : मिथिलेश गुप्ता


''भइया ये भैलेंटाइन डे काहे मनाते हैं ?''

''पिज़ा खा बे,  ये सवाल जवाब हमसे ना पूछा करो और 'वैलेंटाइन' होता है. नाम ना बिगाड़ो बे ;; ई के बारे में ,,भाभी आ रही है ना पूछ लेना, और जैसे सिखाया है वैसे खाओ पिज़्ज़ा रायता ना फैलाओ यहाँ समझे ? "

''अरे उ तो हम खा लेंगे पेट में जाने से मतलब है ,, और आज के दिन का मतलब आपको भी नहीं पता , हैं ना ? ''

''अरे हद करते हो या तुम ,, आज दिन है बस मनाओ और का लोगे ,, तुम्हारी वाली भी आ जायेगी जल्द ही ,, तुम ये पिज़्ज़ा खाओ और हमारी वाली के आते ही मिल लो और निकल लो ,, साले तुम सिटी घूमने आये हो हमारे पास ,वो तू बुआ जान खाए बैठी थी कि चिंटू की घुमा लाना ,, तो आज ले आये ,, पर ये लौंडे ,, सुन लो ,, साले आज हमारी डेट है बे ,, और उसमें  मुह ना मारो। ई खाओ और निकाओ समझे का ''

''अरे न भइया आप पिज़्ज़ा खिला दिए इहे बहुत है ,, जानते हैं हमको खाली पता था पिज़्ज़ा दिखता कैइसा है आज तो खा लिए "

''अउर कउन खिलाया ,, ई मत भूल जहियो ''

"अरे ना मोनू भइया ,, ई कइसे , मतलब आप भी कमाल कर देते हो ,, अभी जो मोबाइल में सेल्फ़ी आपसे खिंचवाए है ना , ऊ जानत हैं काहे लिए हैं ,,""
"काहे बे ?''
"उ बन्नी चाची की पड़ोसन ना है  "
"कउन , रिंकीआ ??''
"हाँ भैइया ''
‘'साले तुम ना मानोगे अब तक ओकरा के लाइन मारते हो का ? हा हा हा  ''

''अरे भैइया आपका आशीर्वाद है बस ,, उ के ई फोटो दिखा के कहेंगे ,, देख हम भी इ पिज़ा खाए थे जो टी वी में आता है ,, कितन खुश हो जायेगी ,,, ''

''साले ,, मज़े मारो ,, और अगले वैलेंटाइन तक उ का बोल दियो ,, आई लभ यू "
''जी भैइया ''

''साले लजा रहे हो ,, बाद में का होगा ,, खाओ खाओ रिंकिया के दिखावे वाला पिज़ा तोहार ''


तभी मोनू का फोन बजा ,,
'यस बेबी ,, I'm in Pizza Hut  now,  yeah come  , आ जाओ ,, चिंटू भी मिलने का बोल रहा था मिल लो, फिर वो रूम पर चला जाएगा ,,हाँ.. हाँ ..Darling..हम लोग जाएंगे मूवी ,, टिकट हो गया है हम दोनों का ,, okay baby,  love you see you "

फोन रखने के बाद ,

''वा...  भइया का इंग्लिश बोले हैं भाभी ज़ोरे ''

''ई सब तुम सिख जाओ गे चार दिन रहोगे  न सिटी में ''

''अरे भैइया हम तो अइबे किये हैं यहाँ नौकरी खातिर ,,,सिटी में सब गड़बड़-गड़बड़ चीज़ें लोग सिख लेते हैं चार दिन में हम ई देख लिए हैं बस  "

''नौकरी मिल जाएगा बे ,, ना मिला तो बुआ हमको लतिया ना देगी गाँव जाते ही, और चीज़े तुम भी सिख जाओगे देख-देख के सब  ''

''बड़ा मुस्किल होता होगा ना हिंदी ,भजपुरी आउर फिर अंग्रेजी , "'

''अबे इ कुछ ना है ,, ओफ्फिसिया में तो बहुत बोलना पड़ता है खाली अंग्रेजी, ले भकाभक ,, ले भकाभक अंग्रेजी ''

''अरे का बात है ,, भइया हम सिख जाएंगे ना ई सब ,, ''

'' हम हैं ना ! चिंता ना करो ,, ''

''भइया आप रूम पर थे ना। तब आप भाभी आउर अपने लिए 'लेपिया' से टिकट बुक किये , मूवी का ,, हम को भी सीखा दीजिये ,, उ ससुरा बहुत भीड़ रहता है ,, हमनी के इहां गांव वाले ज्योतिया थेअटर्वा में ''

''अरे यार ऊंहा ,, नहीं होता है ,,, मतलब यार का समझाएं अब ,, सुनो !तुम यार पिज़्जा खाओ बाद में समझा देंगे ,, एक दिन में सब ज्ञान ना जान लो ,, और तुमको यहाँ क्यों लाये हैं भूल ना जाना ,, बुआ या मम्मी पूछे लड़की कैसी थी तो कहाँ भैया लायक है और परिवार का बड़ा ख़याल रखेगी ,, सीता है सीता कहना ''

‘’ भइया आप चिंता काहे कर रहे हैं ,, आपकी शादी का ज़िम्मा हमको मिला है ,, 'हाँ ' ही होगा आप टेंसनिया ना लो, हम सबको समझा देंगे  ''

---------
''अरे , तुम्हारी भाभी आ गयी ,, ''

''hi baby meet my cousin,, Chintu ""

''Yeah i know him, तुमने फोटो भेजा था न सुबह ''

''नमस्ते भाभी '' चिंटू ने पिज़्ज़ा मुहं से निकाल कर कहा जो मुहं में अभी गया ही था ,, और फिर वापस खा लिया। 

'साले गवाँर ' मोनू बड़बड़ाया। 

''अरे बैठो ना श्रुति ,, ये मेरे बुआ का लड़का है ,, मम्मी बोली वो आ नहीं पाएगी और ये आ ही रहा है तो तुमसे मिल ले , तुमको बताया ही था न ये सब ,, आखिर खानदान में हमारी पहली लव मैरिज होगी ''

'''I  know ,, खैर अच्छा लगा तुमसे मिलके चिंटू '' श्रुति ने मोनू के बगल में बैठते हुए कहा।
चिंटू उन्हें सामने वाली टेबल पर बैठा हुआ था। 

''अरे भाभी आप बहुत सुन्दर हैं ,सच्ची में , ''
''ओह्ह थैंक यू चिंटू ''

''अरे ई भइया फालतू टेंसनिया जाते हैं ,, कह रहे थे अम्मा को और बुआ को बोल देना की भाभी अच्छी थी ,, अरे आप तो सच्च में अच्छी हैं ,, '' चिंटू मासूमियत से बोला ,, गाव का भोला-भाला चिंटू सच ही बोल रहा था , श्रुति काफी सुन्दर लड़की थी। 

श्रुति ने मोनू को एक गुस्से वाला लुक दिया। 

''अरे......  मुझे लगा ,अगर ये ऐसा नहीं बोलेगा तो घर वाले ,, समझ रही हो ना, ''

''मतलब मैं सुन्दर नहीं हूँ. यही ना , जो अपने भाई से झूठ बोलवा रहे थे '' 

''अरे तुम ब्रेकअप करवाओगे अब क्या ,,?? ,,भैलेंटाइन के दिन ही '' मोनू चिंटू की तरफ देख कर घूरा जो अब भी पिज़्ज़ा का लास्ट टुकड़ा गटक रहा था .

श्रुति मोनू को घूर रही थी ,'

''अरे भइया भुला गए का ,?? , भैलेंटाइन नहीं वैलेंटाइन '' वो हंसा।

श्रुति और मोनू एक दूसरे को घूर रहे थे। 

थोड़ी देर सन्नाटे के बाद। ..

'भाभी आप इ बताईये आज का दिन क्यों मनाते हैं ?''
 
''अरे आज प्यार का दिन है "

''अच्छा और बाकी दिन कोई प्यार नहीं करता का ? ''
''अरे मतलब ,, फिल्म नहीं देखते ,, ''
''हिंदी-इंग्लिश दोनों देखते हैं, लपक के ''
''अरे इंग्लिश ''

''हाँ देखते हैं पर उ हिंदी डबिंग में देखते हैं, थोड़ा अंग्रेजी गड़बड़ है हमारा , ''

''कोई बात नहीं। पर उसमे कभी देखा नहीं क्या , और आजकल तो हिंदी फिल्मो में भी आ रहा है ,, ये प्यार का दिन होता है ,, दो प्रेमियों के लिए, प्यार दो और प्यार लो टाइप , ''

''मतलब सब अंग्रेजी फिलम से सीखते हैं और मानते हैं ?'' 

''अरे बाद में भाभी बता देगी यार ,, " मोनू बीच में बोल पड़ा, श्रुति के बोलने से पहले। 

''अच्छा , ,कोई बात नहीं भाभी बाद में फिर कभी आज आपका दिन  है ,, आप लोग आज प्यार कीजिये, घूमिये । ..फिल्म में अब जरूर ध्यान देंगे, अउर  का सिखाता है उ में  ''

श्रुति ने उसे स्माइल दिया।
''excuse me three vanilla ice cream please "'..मोनू ने आर्डर किआ।
 ________

''अरे भाभी हैप्पी वैलेंटाइन डे, भइया गुस्सा ना करियेगा आज लभ का दिन है किसी को भी बोल सकते हैं ना, हैं ना भाभी ? ''
श्रुति उसे देखकर मुस्कुरा दी। मोनू जाने क्यों दांत पीस रहा था।
तीनो पिज़्ज़ा हट से बहार आये ,,श्रुति,मोनू  के हाथ में एक-एक आइसक्रीम था और एक आइसक्रीम चिंटू के हाथ में भी था।
 क्यूंकि श्रुति को पिज़्ज़ा खाना नहीं था। और मूवी का टाइम भी होने को था।
''देखो मोनू ऑटो पकड़ा देंगे और बताया था ना पांच मिनट में वो हमारे रूम के पास छोड़ देगा याद हैं ना, चले जाओगे ना  ''
''अरे भइया सब याद है ,, आप जाइए भाभी के साथ घूम के आईये ''

''सब सिख जाएगा अभी-अभी गाँव से आया है ना ''पीछे चलते हुए मोनू श्रुति से बोला ,, शायद वो चिंटू के इस बड़बोले पन से अजीब सा महसूस कर रहा था। 

''ऑटो ,,, ऑटो '' रोड पर आते ही ,, मोनू ने ऑटो वाले को हाथ दिया, ''ठीक है चिंटू तुम जाओ हम शाम को आते हैं रूम पर ''

श्रुति और मोनू का आइसक्रीम खतम हो चूका था।
______

मोनू ऑटो में बैठ गया , तभी वो चीखा ,,

''अरे भइया ,, का ,, का कर रहे हैं ई '' वो ऑटो से उतरा और उनकी तरफ बढ़ा ,, 

''अब क्या हुआ बे '' मोनू उसके इस तरह से बिहारी टोन में ज़ोर से चीख को सुनके बोला। 

''अरे भइया। .आइसक्रीम खा कर कागज निचे गिरा दिए ,… कितना साफ़ जगह है ,, और ,, भाभी आप भी ??""  उसने दोनों को घूरा ,चिंटू ने अपना थोड़ा बचा हुआ आइसक्रीम मोनू को पकडा दिया और नीच बैठ कर उन गिरे हुए आइसक्रीम के कागज को उठाने लगा .

'’अबे …क्या कर रहे हो चिंटू उठो यार ''मोनू का पारा चढ़ गया , उसे बहुत बुरा महसूस होने लगा था.

 ऑटो वाले के साथ साथ आस-पास के लोग भी उसे देख रहे थे. श्रुति तो दूर ही हट चुकी थी जैसे वो उनको जानती ही नहीं थी। 

''का भइया ,, इतना बढ़िया शहर है अउर आप लोग गन्दा कर रहे हैं फिर हम जइसा लोग यहाँ आके का देखेगा, सरकार को कोसते हैं फिर ,, गन्दगी के नाम पर ,,गाँव में मालूम है अईसा डब्बा ना होइन के कारण  केतना दूर जाके फेंकना पड़ता है कचरा  " चिंटू बोला उसके हाथ में गिरा हुआ वो कागज था जिसे उसने उठा लिया था।

''अबे गाँव नहीं है ये सब रहने दो यार '' चिंटू चिल्लाया ,, उसका बस चलता तो उस पर हाथ उठा देता। जो चिंटू ने देख लिया। 

''आप मारने वाले थे का हमको ,,वाह भइया।  भाभी हमको इ कचरा उठाते देखि तो देखो कहाँ जाके खड़ा हो गयी ,, का भाभी हम तो कचरा नहीं उठा रहे थे, आप ही लोग तो फेंके थे ,, वही उठाये ,, आप फेंके काहे ,,जबकि उहाँ डब्बा रखा हुआ है फेंकने के लिए तब उ का... का मतलब हुआ ? जब से कल से आया हूँ यहाँ हर जगह यही सब देख रहा हूँ ,, अरे भाभी शरम मत कीजिये ,, आपका ही शहर है ना ,, और ये आप ही गिराये हैं ,, ,''

''चिंटू ,,, चुप !!! चल घर जा ,,, बाद में बात करेंगे '' अब तक काफी लोग जमा होने लगे थे।
''मैं जा रही हूँ ,, मोनू ,, अपने भाई के साथ वैलेंटाइन मनाओ ,, बाय '' श्रुति जाने लगी ,, और मोनू उसे रोकने लगा ,, 

''भाभी माफ़ कीजिये हम जा रहे हैं ,, सॉरी ,, आप लोग का शायद बेइजत्ती हो गया है ना ?'' कहकर वो ऑटो में बैठ गया जो अब तक वहीँ खड़ा था। उसके हाथ में अब भी वो दोनों कागज और पिघलता हुआ उसका आइसक्रीम था जो मोनू ने उसको पकड़ा दिया था.

''साले भाभी के सामने ई सब का कर रहे हो बे , चलो जाओ अब यहाँ से '' मोनू गुस्से में उसको ऑटो के अंदर घुसाते हुए बोला। 


श्रुति अब भी उसे दूर से घूर रही थी। 

''अरे भैया ,, वैलेंटाइन मना रहे हो. भाभी बोली उ सब विदेश का चलन है , पर शायद आप लोग विदेश का ई सब अपना लिए हैं. पर आप कभी देखे हैं ,, विदेश का कौनो फिलम में कही गंदगी ,,, बाप रे केतना साफ़ सुथरा देश रहता है ,, उ कोई नहीं देखता ना ,, कल से आये हैं यही सब देख रहे हैं कचरा जहाँ मन वहां डाल दिए एक हम लोग हैं कचरा फेंकने दूर-दूर जाकर फेंकते हैं, अउर पास में होने के बाद यहाँ कोई फेंक नहीं रहा , रुको हम उ डब्बा में डाल आते हैं  '' . 


 चिंटू डब्बे में कचर डाल  कर आया। और लोग उसे घूरते रहे, मोनू तो गुस्से से लाल पिला सा हो गया था। उसे अपने गिराये हुए कचरे को उठाने में ही शर्म आ गयी थी। 

''फिलम में का सीखे पता नहीं ,, पर ई सब तो बचपन से किताब से सीखते आये हैं , सब लोग वैलेंटाइन मना रहा है इ सब कौनो नहीं ध्यान दे रहा है, देहात में वैलेंटाइन मनाया जाएगा ना तो हमको उम्मीद है ई सब ध्यान रखा जाएगा, अरे मोहब्बत का सिर्फ एक लोग से होता है ''  ''

''अरे ज्यादा ज्ञान ना दो ,, ऐ भैया तुम ऑटो निकालो यार '' मोनू चिल्लाया।

''भाभी आप लड़की हो लडकिया तो घर का साफ़ सुथरा रखने का ध्यान रखती है ,, पर सब अपन घर का ही ध्यान रखेगा तो देश का ख्याल कउन रखेगा ,,  माफ़ कीजियेगा ई सब  ,, आप फेंक दिए, हम उठा लिए ,, पर आप लोग का बेइजत्ती का इरादा ना था ,, अपना कचरा उठाने में शर्म काहे ,, जब गिराने में नहीं है तो,  हैप्पी वैलेंटाइन डे ,,,,,,,,''

'',,,आप लोग सिर्फ वही अपनाइये जो जरुरी नहीं ऊ सब मत करिये जो जरुरी है ,,लभ वाला डे तो साफ़ सुथरा ही होना चाहिए ना ,, इ भी तो लभ है ना ,,,  लोगों के लिए ,, ,,,,,,,ऐ ऑटो बढ़ाओ हो ,,,, चलो बसंत पूरी चलो, सिटी में इ सब सिखने नहीं आये हैं हम , 
और उम्मीद हैं अउर लोग भी अपनी सभ्यता ना भूलें ,, पता नहीं का होगा सबका ,, हमको तो  दुइये दिन में टेंशन हो गया है, हम उ सब सीखें चाहते हैं जो जरुरी है ई सब नाही जो काम के चीज़ भुला दे। साफ़ सुथरा रहे से मन भी साफ़ रहता है ,, इ दिन कोई नहीं मनाता का , माफ़ कीजियेगा भइया भाभी ,,  '''
और ऑटो चल पड़ी.

वहां खड़े श्रुति ,मोनू के साथ और भी लोग सुन चुके थे ,,  ,, मोनू बहुत अपमानित महसूस कर रहा था ,, अपने गवांर भाई के कारण ,पर वो समझ नही पा रहा था गवांर था  कौन ?, श्रुति अब भी चुप थी।
 
पर कभी कभी अनपढ़ लोग वो सीखा जाते हैं जो पढ़े लिखे लोग जानकार भी नहीं करते। हम वो सीखते हैं जो जरूरी नहीं , पर जो बचपन से सीखा है  भुलाने में  एक हिचक नहीं करते , हैं ना ???


A perfect ending,,
Happy valentine’s day
make everyday a love day
with different things


Story by: Mithilesh Gupta
 
Follow me: Facebook/Mithileshgupta152
Blog: Mithileshgupta152.blogspot.com



Comments

Popular Posts