एक अनकही सी प्रेम कहानी ''प्राची और अनिकेत ''की from my upcoming novel ( JUST LIKE THAT)
एक अनकही सी प्रेम कहानी ''प्राची और अनिकेत ''की
''प्यार में वादे थोडी ना होते हैं ,एंजेल "
"अच्छा ! तो फिर क्या होता है मेरे प्रिंस?" प्राची के चहरे पर एक सुन्दर सी मुस्कान थी।
''प्यार में ,, अपने साथी के हर सपने को अपने सपनो से जोड़कर पूरा किआ जाता है ,, यही तो प्यार है, '' अनिकेत भी मुस्कुरा रहा था।
"और ,.,,,, ?''
"और ,, कभी ना छोड़ कर जाने वाला एक अनकहा वादा होता है "
''और। .. अगर कभी मैं चिल्ला कर भी कह दूँ ना की मुझे छोड़ के चले जाओ , क्या तुम चले जाओगे "
"मरते दम तक ऐसा नहीं होगा प्राची ,,,,,,,और अगर कभी गुस्से से मेरे मुहं से ऐसा निकल जाए तो ?''
प्राची ने अनिकेत के होंठो पर हाथ रखते हुए कहा " मैं तो सिर्फ तुम्हारी हूँ ना , भला मैं कहाँ जाने लगी "
"मैं जानता हूँ ,, और मैं भी तो सिर्फ तुम्हारा ही हूँ लाइफटाइम तक ,"
जस्ट लाइक दैत। . से
मिथिलेश गुप्ता की कलम से
''प्यार में वादे थोडी ना होते हैं ,एंजेल "
"अच्छा ! तो फिर क्या होता है मेरे प्रिंस?" प्राची के चहरे पर एक सुन्दर सी मुस्कान थी।
''प्यार में ,, अपने साथी के हर सपने को अपने सपनो से जोड़कर पूरा किआ जाता है ,, यही तो प्यार है, '' अनिकेत भी मुस्कुरा रहा था।
"और ,.,,,, ?''
"और ,, कभी ना छोड़ कर जाने वाला एक अनकहा वादा होता है "
''और। .. अगर कभी मैं चिल्ला कर भी कह दूँ ना की मुझे छोड़ के चले जाओ , क्या तुम चले जाओगे "
"मरते दम तक ऐसा नहीं होगा प्राची ,,,,,,,और अगर कभी गुस्से से मेरे मुहं से ऐसा निकल जाए तो ?''
प्राची ने अनिकेत के होंठो पर हाथ रखते हुए कहा " मैं तो सिर्फ तुम्हारी हूँ ना , भला मैं कहाँ जाने लगी "
"मैं जानता हूँ ,, और मैं भी तो सिर्फ तुम्हारा ही हूँ लाइफटाइम तक ,"
जस्ट लाइक दैत। . से
मिथिलेश गुप्ता की कलम से



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