बेवफाई का खत , एक बेवफा के नाम



         बेवफाई का खत , एक बेवफा के नाम
हर एक दिन एक अरसे में गुज़ारा था तेरे संग
जब तू और मैं थे संग-संग  ,
वो भी क्या दिन थे क्या रातें थी ,
जब तुम्हारी बातों में हर गुजरता हुआ दिन तेरे प्यार के सहारे बीत जाता था।
तू जब मुस्कुराती थी तो अपनी सारी खुशियाँ तुझमे देख लिए करता था !
दिल थी तू ही और मेरी धड़कन भी ,
आज भी याद है कैसे हर सपनों को मेरे साथ तू देखा करती थी ,
कभी पता ही न था वो तेरे संग पुरे ही न होंगे वो सपने जो तूने दिखाए थे !
आदत ही नहीं थी तेरे बिन एक पल भी रहने की ,
लगता है अब जैसे हर दिन सालों में गुजर रहा है तुझ बिन ,
लगता है जैसे मैं मर रहा हूँ,
तू तो जान थी मेरी , पर तेरे ना होने के बाद भी न जाने कैसे आज भी मैं ज़िंदा हूँ !
जब तुझे दूर ही जाना था
तो कभी तेरे बिन रहने की आदत भी लगायी होती ,
जब मैं तेरे न होने पर रोया करता था ,
मेरे आंशूं ना पोछकर , मुझसे कह दिया होता "आदत डाल लो इसकी भी " !
खैर आज तेरे दामन में वो है जिसे तू चाहती है ,
और मेरे दामन में मेरा खाली नसीब है उसका जिसे मैं चाहता रहा ,
इश्क़ किया था
फरेब नहीं , और तू ना जाने कब इश्क़-ऐ- फरेब कर गयी ,
जा दुआ करता हूँ आज भी
तू खुस रहना और अब उसके साथ फरेब न कर बैठना
जो अब तेरे पास है !
From- Just Like that...Love is on

Comments

Popular Posts