तू यादों में है.
हाँ तू आज भी उन यादों में हैं ,,,
उन ख़्वाबों में है उन अधूरे जज़्बातों में हैं ,,,
उन सवालों में है ,, उन जवाबों में है ,,
हाँ तू आज भी उन यादों में है..
सुबह की किरणों में है ,
शाम के जामों में हैं ,
दोपहर की धुप में हैं ,
रात के तारों में है ,,
हाँ तू आज भी उन यादों में है.
तू उन सर्द रातों में हैं ,
उन चुभती हुयी बातों में है ,,
आँखों से बहते आंशूंओ में है ,
अटक कर चलती उन साँसों में है ,,
हाँ तू आज भी उन यादों में है.
-------मिथिलेश गुप्ता



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