एअरपोर्ट से शहर की ओर तेजी से भागती कैब की विंडो से बाहर का नज़ारा अब बिल्कुल धुंधला नज़र आ रहा था। अचानक बारिश की बुँदों ने मिरर पर कब्जा जो जमा लिया था!
भारी सा मन, और बैचेन आंखें, बस उसकी एक झलक दुबारा पाने के लिये बेताब थी। क्या आज वो फिर मुझसे मिलने के लिये उतनी ही बेताब होगी, जितना कि मैं हूँ? क्या आज फिर वो अपने बहुमुखी अंदाज से बस अपनी ही बाते बतायेगी?
क्या आज फिर वो उतना ही प्यार जतायेगी?
आज पहली बार समझ आया था "मुलाक़ात" की बेसब्री क्या होती है! क्या वो भी इसे इतना ही समझ पायेगी?
❤
#मुलाक़ात
#MicroStory
Mithilesh Gupta



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