(Something for me ...) Just Like Me

 बड़ा रोयाँ हूँ मैं  ,, आँखें सूजी नहीं है तो क्या हुआ,
 आँखों में नमी नहीं तो क्या हुआ ,
चेहरे पर आज भी वही मुस्कान लिए घूमता हूँ ,
  उसके पीछे के ज़ज्बात कुछ और हुए तो क्या हुआ
,  पागल था और रहूँगा ,अब भी है विश्वाश उसमे ,
जो विश्वाश टूट गया तो क्या हुआ।

अक्सर घूरता हूँ उन लम्हों को आँखें बंद करके
 आँखों में दर्द उभर आये, तो क्या हुआ।
बड़ी अजीब से है कसमकस यहाँ पर जीने की ,
 अंदर से मरा चूका हूँ तो क्या हुआ।

देख ,आज भी वहीँ हूँ जो  कल देखा था तुमने ,
बदली वो रूह मेरे अंदर है ,तो क्या हुआ।
  आ बैठ कभी रातों में संग मेरे , देख मुझे यूँ रात भर ,
  मेरे बदले मिज़ाज़ और चेहरे का नूर बिखर जाए तो क्या हुआ।

आज भी वहीँ हूँ जो कल था ,
तू देख ना पाये तो क्या हुआ।  .   
                       ***********मिथिलेश गुप्ता **********

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