सपनों की बारिश -II ( A Love Tale By Mithilesh Gupta)

याद है ,
वो किस जो हमने बारिश में किया था ,

याद है वो मौसम और वो घटाएं।
शायद बारिश भी हमारे मिलन की ख़ुशी में बरस रहा था ,
याद है ,
वो पहला hug  जो हमने बारिश में किया था।

आज भी बारिश हो रही थी ,
और मैं वहीँ था जहाँ कल तुम मेरे साथ थी ,
तन्हा सा आँखों में आँशु लिए
निहारता रहा उस बारिश को ,

'ऐ बारिश आज क्यों बरस रहा है आज तो मैं अकेला हूँ "
बारिश बोला ,'सामने देख ,आज फिर कोई जोड़ा इस बारिश की आड़ में है '

याद है ,
वो साथ  जो हमने बारिश में बिताया था।

देखो ना सपनों की बारिश
आज फिर हो रही है जहाँ मैं अकेला हूँ।

जहाँ शायद कल कोई और अकेला होगा

MitGupta
January 26th 2016
11:55 PM

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