प्रांजल की कहानी

ऐसा नहीं है कि मैं अकेली हूँ, ऐसा है कि अब खुद से बाते करने
लगी हूँ ! ऐसा है कि खुद को कहानियां सुनाने लगी हूँ! मैं पागल नहीं हूँ ! अगर इश्क में लोग पागल होते हैं तो हां मैं पागल ही हूँ !पर मैं नहीं भूल सकती, इश्क वाली यादों को, उन इश्क वाली खुशबू को जिसमे तुम बसे हो! ऐसा है कि भूल तुम भी नहीं पाते हो, पर तुम्हारा यूँ रूठ जाना आज भी समझ नहीं आता!

तेरी इश्श्क़ वाली खुशबू... से ...एक लड़की प्रांजल की कहानी

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