Who Bhayanak raat - (A horror Fiction)- About this Book कहते हैं कि भूत प्रेतों पर विश्वास दो तरह के लोग करते हैं एक वो - जो उन्हें मानते हैं और दूसरे वो - जो उन्हें देख लेते हैं
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ebook --http://www.readwhere.com/publication/11242/Woh-Bhayanak-Raat
@ मिथिलेश गुप्ता
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दृश्य -१
समय रात्री ११;40 ,
११ जनवरी २००४
अमावश की एक मनहुश रात .
चारो तरफ फैला हुआ घना अँधेरा .
एक सड़क और सड़क के दोनों तरफ फैला एक घना जंगल .
सड़क पर दौडती एक
कार.
कार में मिस्टर संग्राम सिंह अपनी पत्नी अर्चना , बेटे राहुल और बहु गीता
के साथ अपने दोस्त के बेटी की शादी से शहर के बाहर से लौटते हुए.
“पापा आज शादी में बहुत मजा आया .आपने शर्मा जी को देखा कितना हंगामा किया उन्होंने दारु पीने के बाद “ राहुल कार ड्राइव कर रहा था .
कार के सामने वाली सीट पर वो अपनी पत्नी गीता के साथ बैठा
था और पीछे सीट पर उसके पापा और मम्मी बैठे हुए थे .सभी लोग काफी थके हुए थे .रात भी काफी हो चुकी थी .
“बेटा आजकल ये सब चीज़े शादीयों और पार्टियो में मामूली बात हो गयी है .” संग्राम सिंह बोले.
“आप लोग वो सब छोडिये ,आज इतनी काली घनी रात है ,और ऊपर से ये मनहुष अमावश भी है .मुझे ना जाने क्यों डर लग रहा है रात भी काफी हो गयी है और
ये सड़क ख़तम होने का नाम नही ले रहो ..हे भगवान् जल्दी हम लोग घर पहुँच जाए बस मैंने आप लोगों से पहले ही कहा
था जल्दी घर निकल निकलना चाहिए ,पर आप बाप बेटे मेरी सुनते है कहा “ अर्चना बोली जो
काफी घबरायी हुयी थी.
“क्या मम्मी आप भी ना....
अरे आप कब डरना छोड़ेंगी पापा और राहुल हमारे साथ तो है ना .” गीता बोली .
“हा हा हा “ राहुल और संग्राम सिंह के ठहाके गूँज उठे .
“बेटा तुम नही जानती तुम्हारी मम्मी की ये पुरानी आदत है इनका बस चले तो हम लोग
रात में घर में ही दुबक कर बैठे रहें बस,, और कही बाहर ना जाए ....अरे भाई ये अमावश ,,पूनम ..की रात ...क्या है ये सब ..ऐसा कुछ नही होता समझी ना..सब रात एक जेसी ही
होती है ...चाँद निकला
पूरा तो ...पूनम की रात ..और पूरा डूब गया तो
अमावस की रात ...हा हा हा .. भाई मैं तो डर गया..ये सब प्रकृति के एक चक्र के कारण होता है बस .....” संग्राम सिंह के ठहाको के साथ गीता और
राहुल भी हंस पड़े .
समय – ११;४०
तभी...
अचानक सड़क पर दौड़ रही उनकी कार का संतुलन
बिगड़ा और अगले ही पल एक जोरदार झटके लगने के बाद कार रोड से किनारे एक तरफ एक पेड़
से जा टकराई ..
धड़ाम धाड़ .....
आआआआआआअह
आह ..
संग्राम सिंह और उनकी फॅमिली एक मुसीबत
में आ गयी .
.................................................
-------------------------आखिर क्या मुसीबत आ गयी थी ?
क्या वाकई अर्चना का शक और दर सच होने वाला था या कुछ और ????
जानने के लिए जरुर पढ़े , सुनसान सड़क पर दौड़ती दर का एक खूंखार मंजर .



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